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सुमित्र

From जैनकोष

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== सिद्धांतकोष से == म.पु./61/श्लोक-राजगृह नगर का राजा बहुत बड़ा मल्ल था (57-58) राजसिंह नामक मल्ल से हारने पर (59-60) निर्वेद पूर्वक दीक्षा ग्रहण कर ली (62)। बड़ा राजा बनने का निदान कर स्वर्ग में देव हुआ (63-65) यह पुरुषसिंह नारायण का पूर्व का दूसरा भव है।-देखें पुरुषसिंह ।


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पुराणकोष से

(1) कुरुवंशी राजा सागरसेन का पुत्र और राजा वप्रभु का पिता । हरिवंशपुराण 18. 19

(2) शौर्यपुर नगर के एक आश्रम का तापस । सोमयशा इसकी पत्नी थी । यह उच्छवृत्ति से जीविका चलाता था । उच्छवृत्ति के लिए पुत्र को अकेला छोड़ जाने से इसके पुत्र को जृम्भक देव उठा ले गया था । जो नारद नाम से विख्यात हुआ । हरिवंशपुराण 42.14-27, देखें जृम्भक

(3) हरिवंश में हुआ कुशाग्रपुर नगर का राजा । इसकी रानी पद्मावती थी । ये दोनों तीर्थङ्कर मुनिसुव्रत नाथ के माता-पिता थे । महापुराण 67.20-21, 26-28, पद्मपुराण 20.56, 21.10-24, हरिवंशपुराण 15.91-92, 16.17

(4) वसुदेव और उनकी रानी मित्रश्री का पुत्र । हरिवंशपुराण 48.58

(5) कृष्ण की पटरानी जाम्बवती के पूर्वभव का पति । हरिवंशपुराण 60.43-44

(6) विदेहक्षेत्र तो पुष्कलावती देश की पुण्डरीकिणी नगरी का राजा । यह प्रियमित्र का पिता था । महापुराण 74.235-237, वीरवर्द्धमान चरित्र 5.35-37

(7) ऐरावतक्षेत्र में शतद्वारपुर के निवासी प्रभव का मित्र । इसका विवाह म्लेच्छ राजा द्विरद्दंष्ट्र की पुत्री वनमाला से हुआ था इसने अन्त में मुनि दीक्षा ले ली थी तथा आयु के अन्त में मरकर ऐशान स्वर्ग में देव हुआ । वहाँ से चयकर यह मथुरा नगरी का राजा मधु हुआ । पद्मपुराण 12.22-23, 26-27, 52-54

(8) कौशल देश की साकेतपुरी, पद्मपुराण के अनुसार श्रावस्ती का राजा और चक्रवर्ती मघवा का पिता । महापुराण 61.91-93 पद्मपुराण 20. 131-132

(9) छठे बलभद्र नन्दिमित्र के गुरु । पद्मपुराण 20. 246-247

(10) भरत के साथ दीक्षित एक नृप । पद्मपुराण 88.1-6

(11) मन्दिरपुर नगर का नृप । इसने तीर्थंकर शान्तिनाथ को आहार दिया था । महापुराण 63.478-479

(12) सुसीमा नगरी के राजा अपराजित का पुत्र । महापुराण 52. 3, 12

(13) राजगृह नगर का राजा । राजसिंह से हारने के पश्चात् यह पुत्र को राज्य देकर दीक्षित हो गया था । निदानपूर्वक मरकर यह माहेन्द्र स्वर्ग में देव हुआ । महापुराण 61.57-65

(14) सुजन देश संबंधी हेमाभनगर के राजा दृढ़मित्र का तीसरा पुत्र । यह गुणमित्र और बहुमित्र का अनुज तथा धनमित्र का अग्रज था । इसकी हेमाभा बहिन थी, जो जीवन्धर के साथ विवाही गयी थी । महापुराण 75.420-430


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