किन्नर
From जैनकोष
इस जाति के व्यंतर देव । ये समतल भूमि से बीन योजन ऊपर विजयार्ध पर्वत के इसी नाम के नगर में रहते हैं । तीर्थंकरों के कल्याणोत्सवों में मांगलिक गीत गाते हुए ये देवसेना के आगे-आगे चलते हैं । महापुराण 17.79-88,22.21, पद्मपुराण 3. 309-310, 7.118, हरिवंशपुराण 8.158, वीरवर्द्धमान चरित्र 14.59-63 (2) एक नगर । किन्नर जाति के व्यंतर देवों की निवास भूमि । नमिकुमार का मामा यक्षमाली इसी नगर का राजा था । महापुराण 71. 372, धपु0 7.118