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अरिरजरहस हनन प्रभु अरहन

From जैनकोष

अरिरजरहस हनन प्रभु अरहन, जैवंतो जगमें ।
देव अदेव सेव कर जाकी, धरहिं मौलि पगमें ।।१ ।।अरिरज. ।।
जो तन अष्टोत्तरसहसा लक्खन लखि कलिल शमें ।
जो वच दीपशिखातैं मुनि विचरैं शिवमारगमें ।।२ ।।अरिरज. ।।
जास पासतैं शोकहरन गुन, प्रगट भयो नगमें ।
व्यालमराल कुरंगसिंघको, जातिविरोध गमें ।।३ ।।अरिरज. ।।
जा जस-गगन उलंघन कोऊ, क्षम न मुनी खगमें ।
`दौल' नाम तसु सुरतरु है या, भव मरुथल मगमें ।।३ ।।अरिरज. ।।