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आपा प्रभु जाना मैं जाना

From जैनकोष

आपा प्रभु जाना मैं जाना
परमेसुर यह मैं इस सेवक, ऐसो भर्म पलाना।।आपा. ।।
जो परमेसुर सो मम मूरति, जो मम सो भगवाना ।
मरमी होय सोइ तो जानै, जानै नाहीं आना ।।आपा. ।।१ ।।
जाकौ ध्यान धरत हैं मुनिगन, पावत हैं निरवाना ।
अर्हत सिद्ध सूरि गुरु मुनिपद, आतमरूप बखाना ।।आपा. ।।२ ।।
जो निगोदमें सो मुझमाहीं, सोई है शिव थाना ।
`द्यानत' निहचैं रंच फेर नहिं, जानै सो मतिवाना ।।आपा. ।।३ ।।