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आयो रे बुढ़ापो मानी, सुधि बुधि बिसरानी

From जैनकोष

(राग बंगला)
आयो रे बुढ़ापो मानी, सुधि बुधि बिसरानी ।।टेक ।।
श्रवन की शक्ति घटी, चाल चालै अटपटी,
देह लटी, भूख घटी, लोचन झरत पानी ।।१ ।।आया रे. ।।
दांतनकी पंक्ति टूटी, हाड़नकी संधि छूटी,
कायाकी नगरि लूटी, जात नहिं पहिचानी ।।२ ।।आया रे. ।।
बालोंने वरन फेरा, रोगों ने शरीर घेरा,
पुत्रहू न आवे नेरा, औरोंकी कहा कहानी ।।३ ।।आया रे. ।।
`भूधर' समुझि अब, स्वहित करैगो कब,
यह गति ह्वै है जब, तब पिछतै हैं प्राणी ।।४ ।।आया रे. ।।