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जिन के भजन में मगन रहु रे!

From जैनकोष

जिन के भजन में मगन रहु रे!
जो छिन खोवै बातनिमांहिं, सो छिन भजन करैं अघ जाहिं।।१ ।।
भजन भला कहतैं क्या होय, जाप जपैं सुख पावै सोय।।२ ।।
बुद्धि न चहिये तन दुख नाहिं, द्रव्य न लागै भजनकेमाहिं।।३ ।।
षट दरसनमें नाम प्रधान, `द्यानत' जपैं बड़े धनमान ।।४ ।।