• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

Help
 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

काली: Difference between revisions

From जैनकोष

Revision as of 21:39, 5 July 2020 (view source)
Maintenance script (talk | contribs)
(Imported from text file)
← Older edit
Latest revision as of 14:41, 27 November 2023 (view source)
Maintenance script (talk | contribs)
(Imported from text file)
 
(7 intermediate revisions by 4 users not shown)
Line 1: Line 1:
== सिद्धांतकोष से ==

== सिद्धांतकोष से ==
<ol>
<ol>
  <li> भगवान् पुष्पदन्त की शासक यक्षिणी–तीर्थंकर/5/3 </li>
<span class="HindiText"> <li> भगवान् पुष्पदंत की शासक यक्षिणी–तीर्थंकर/5/3 </li>
   <li> एक विद्या–देखें [[ ]]‘विद्या’। </li>
   <li> एक विद्या–देखें [[ विद्या ]]। </li>
</ol>
</ol>


Line 12: Line 13:
</noinclude>
</noinclude>
[[Category: क]]
[[Category: क]]


== पुराणकोष से ==
== पुराणकोष से ==
<p id="1"> (1) साकेत नगर के निवासी ब्राह्मण कपिल की पत्नी और जटिल की जननी । <span class="GRef"> महापुराण 74.68,  </span><span class="GRef"> वीरवर्द्धमान चरित्र 2.105-108 </span></p>
<span class="HindiText"> (1) साकेत नगर के निवासी ब्राह्मण कपिल की पत्नी और जटिल की जननी । <span class="GRef"> महापुराण 74.68,  </span><span class="GRef"> वीरवर्द्धमान चरित्र 2.105-108 </span></br><span class="HindiText">(2) एक देवी । पूर्वजन्म में यह सर्पिणी थी । किसी विजातीय सर्प के साथ रमण करते हुए देखकर जयकुमार के सेवकों ने सर्प और सर्पिणी दोनों को बहुत दंड दिया था जिससे मरकर नाग तो गंगा नदी में इस नाम का जल-देवता हुआ और नागी काली देवी हुई । काली देवी ने मगर का रूप धरकर जहाँ सरयू नदी गंगा में मिलती है वहाँ जयकुमार के तैरते हुए हाथी को पूर्व वैरवश पकड़ा था जिसे सुलोचना के त्याग से प्रसन्न हुई गंगादेवी ने इससे मुक्त कराया था । <span class="GRef"> महापुराण 43. 92-95, 45. 144-149  </span><span class="GRef"> पांडवपुराण 3.5-13, 160-168  </span></br><span class="HindiText">(3) विद्याधरों की एक विद्या । <span class="GRef"> [[ग्रन्थ:हरिवंश पुराण_-_सर्ग_22#66|हरिवंशपुराण - 22.66]] </span></p>
<p id="2">(2) एक देवी । पूर्वजन्म में यह सर्पिणी थी । किसी विजातीय सर्प के साथ रमण करते हुए देखकर जयकुमार के सेवकों ने सर्प और सर्पिणी दोनों को बहुत दण्ड दिया था जिससे मरकर नाग तो गंगा नदी में इस नाम का जल-देवता हुआ और नागी काली देवी हुई । काली देवी ने मगर का रूप धरकर जहाँ सरयू नदी गंगा में मिलती है वहाँ जयकुमार के तैरते हुए हाथी को पूर्व वैरवश पकड़ा था जिसे सुलोचना के त्याग से प्रसन्न हुई गंगादेवी ने इससे मुक्त कराया था । <span class="GRef"> महापुराण 43. 92-95, 45. 144-149  </span><span class="GRef"> पांडवपुराण 3.5-13, 160-168  </span></p>
<p id="3">(3) विद्याधरों की एक विद्या । <span class="GRef"> हरिवंशपुराण 22.66 </span></p>
   
   


Line 28: Line 26:
[[Category: पुराण-कोष]]
[[Category: पुराण-कोष]]
[[Category: क]]
[[Category: क]]
[[Category: प्रथमानुयोग]]

Latest revision as of 14:41, 27 November 2023



सिद्धांतकोष से

  1. भगवान् पुष्पदंत की शासक यक्षिणी–तीर्थंकर/5/3
  2. एक विद्या–देखें विद्या ।


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

पुराणकोष से

(1) साकेत नगर के निवासी ब्राह्मण कपिल की पत्नी और जटिल की जननी । महापुराण 74.68, वीरवर्द्धमान चरित्र 2.105-108
(2) एक देवी । पूर्वजन्म में यह सर्पिणी थी । किसी विजातीय सर्प के साथ रमण करते हुए देखकर जयकुमार के सेवकों ने सर्प और सर्पिणी दोनों को बहुत दंड दिया था जिससे मरकर नाग तो गंगा नदी में इस नाम का जल-देवता हुआ और नागी काली देवी हुई । काली देवी ने मगर का रूप धरकर जहाँ सरयू नदी गंगा में मिलती है वहाँ जयकुमार के तैरते हुए हाथी को पूर्व वैरवश पकड़ा था जिसे सुलोचना के त्याग से प्रसन्न हुई गंगादेवी ने इससे मुक्त कराया था । महापुराण 43. 92-95, 45. 144-149 पांडवपुराण 3.5-13, 160-168
(3) विद्याधरों की एक विद्या । हरिवंशपुराण - 22.66


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=काली&oldid=124401"
Categories:
  • क
  • पुराण-कोष
  • प्रथमानुयोग
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 27 November 2023, at 14:41.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki