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नंदा: Difference between revisions

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<ol class="HindiText">

   <li> भरतक्षेत्र आर्यखण्ड की एक नदी।‒देखें [[ मनुष्य#4 | मनुष्य - 4]]। </li>
== सिद्धांतकोष से ==
   <li> नन्दीश्वर द्वीप के पूर्वदिशा  में स्थित एक वापी‒देखें [[ लोक#4.5 | लोक - 4.5]]। </li>
<ol class="HindiText">
   <li> भरतक्षेत्र आर्यखंड की एक नदी।‒देखें [[ मनुष्य#4 | मनुष्य - 4]]। </li>
   <li> नंदीश्वर द्वीप के पूर्वदिशा  में स्थित एक वापी‒देखें [[ लोक#4.5 | लोक - 4.5]]। </li>
   <li> रुचक पर्वत निवासिनी एक दिक्कुमारी‒देखें [[ लोक#5.13 | लोक - 5.13]]। </li>
   <li> रुचक पर्वत निवासिनी एक दिक्कुमारी‒देखें [[ लोक#5.13 | लोक - 5.13]]। </li>
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[[ नंदस्थली | पूर्व पृष्ठ ]]


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[[Category: न]]
[[Category: न]]
== पुराणकोष से ==
<div class="HindiText">  <p id="1" class="HindiText">(1) रुचकगिरि के दिक्नंदन कूट पर रहने वाली एक दिक्कुमारी देवी । <span class="GRef"> [[ग्रन्थ:हरिवंश पुराण_-_सर्ग_5#706|हरिवंशपुराण - 5.706]] </span></p>
<p id="2" class="HindiText">(2) समवसरण के अशोकवन की एक वापी । <span class="GRef"> [[ग्रन्थ:हरिवंश पुराण_-_सर्ग_57#32|हरिवंशपुराण - 57.32]] </span></p>
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<p id="9" class="HindiText">(9) पोदनपुर के राजा वसुषेण की प्रियतमा रानी । मलयदेश का राजा चंडशासन इसे हरकर अपने देश ले गया था । वसुषेण उसे वापस नहीं ला सका था । <span class="GRef"> महापुराण 60.50, 52-53 </span></p>
<p id="10">(10) हेमांगद देश में राजपुर नगर के सेठ गंधोत्कट की पत्नी । जीवंधरकुमार का पालन-पोषण इसी ने किया था । <span class="GRef"> महापुराण 75.246-249 </span></p>
<p id="11">(11) भद्रिलपुर के राजा मेघवाहन की रानी । <span class="GRef"> महापुराण 71. 304  </span></p>
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[[ नंदा व्याख्या | अगला पृष्ठ ]]
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[[Category: पुराण-कोष]]
[[Category: न]]
[[Category: प्रथमानुयोग]]
[[Category: करणानुयोग]]

Latest revision as of 15:11, 27 November 2023



सिद्धांतकोष से

  1. भरतक्षेत्र आर्यखंड की एक नदी।‒देखें मनुष्य - 4।
  2. नंदीश्वर द्वीप के पूर्वदिशा में स्थित एक वापी‒देखें लोक - 4.5।
  3. रुचक पर्वत निवासिनी एक दिक्कुमारी‒देखें लोक - 5.13।


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पुराणकोष से

(1) रुचकगिरि के दिक्नंदन कूट पर रहने वाली एक दिक्कुमारी देवी । हरिवंशपुराण - 5.706

(2) समवसरण के अशोकवन की एक वापी । हरिवंशपुराण - 57.32

(3) समवसरण की चारों दिशाओं में विद्यमान चार वापिकाओं में एक वापिका । इसमें स्नान करने वाले जीव अपना पूर्वभव जान लेते हैं । हरिवंशपुराण - 57.71-74

(4) तीर्थंकर वृषभदेव की दूसरी रानी । भरतेश और उनकी बहिन ब्राह्मी इसी की कुक्षि से युगल रूप में जन्मे थे । इसने भरत के अतिरिक्त वृषभसेन आदि अठानवें पुत्रों को और जन्म दिया था । ये सभी पुत्र चरमशरीरी थे । पद्मपुराण -3. 260, हरिवंशपुराण - 9.18-23

(5) भरतखंड के मध्यदेश की एक नदी । यमुना पार करके भरतेश की सेना यहाँ भी आयी थी । महापुराण 29.65

(6) नंदीश्वर द्वीप की पूर्व दिशा के अंजनगिरि की चार वापिकाओ में एक वापिका । यह सौधर्मेंद्र की क्रीड़ा स्थली है । हरिवंशपुराण - 5.658-659

(7) तीर्थंकर अजितनाथ की रानी । पद्मपुराण - 5.64.65

(8) भरतक्षेत्र में सिंहपुर नगर के राजा विष्णु की रानी । यह तीर्थंकर श्रेयांसनाथ की जननी थी । महापुराण 57.17-18,22

(9) पोदनपुर के राजा वसुषेण की प्रियतमा रानी । मलयदेश का राजा चंडशासन इसे हरकर अपने देश ले गया था । वसुषेण उसे वापस नहीं ला सका था । महापुराण 60.50, 52-53

(10) हेमांगद देश में राजपुर नगर के सेठ गंधोत्कट की पत्नी । जीवंधरकुमार का पालन-पोषण इसी ने किया था । महापुराण 75.246-249

(11) भद्रिलपुर के राजा मेघवाहन की रानी । महापुराण 71. 304


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