• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

Help
 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

धनंजय: Difference between revisions

From जैनकोष

Revision as of 22:13, 14 September 2022 (view source)
Jyoti Sethi (talk | contribs)
mNo edit summary
← Older edit
Latest revision as of 22:52, 31 August 2024 (view source)
Chirag (talk | contribs)
No edit summary
 
(6 intermediate revisions by 4 users not shown)
Line 2: Line 2:
== सिद्धांतकोष से ==
== सिद्धांतकोष से ==
<ol class="HindiText">
<ol class="HindiText">
   <li> विजयार्ध की उत्तरश्रेणी का एक नगर–देखें [[ विद्याधर ]]। </li>
   <li> विजयार्ध की उत्तरश्रेणी का एक नगर–देखें [[ विजयार्ध ]]। </li>
   <li> दिगंबरांनाय के एक कवि थे।  आपने द्विसंधानकाव्य और नाममाला कोश लिखे हैं। समय–डॉ.के.बी.पाठक के अनुसार  आपका समय ई.1123-1140 है। परंतु पं.महेंद्र कुमार व पं.पन्नालाल के अनुसार ई.श.8।  (<span class="GRef"> सिद्धि विनिश्चय/ </span>प्र.37/पं.महेंद्र), (<span class="GRef"> ज्ञानार्णव/ </span>प्र.6/पं.पन्नालाल) </li>
   <li> दिगंबरांनाय के एक कवि थे।  आपने द्विसंधानकाव्य और नाममाला कोश लिखे हैं। समय – डॉ. के. बी. पाठक के अनुसार  आपका समय ई. 1123-1140 है। परंतु पं. महेंद्र कुमार व पं. पन्नालाल के अनुसार ई. 8।  <span class="GRef">( सिद्धि विनिश्चय/प्र.37/पं.महेंद्र )</span>, <span class="GRef">( ज्ञानार्णव/प्र.6/पं.पन्नालाल )</span> </li>
</ol>
</ol>


Line 14: Line 14:
[[Category: ध]]
[[Category: ध]]
[[Category: प्रथमानुयोग]]
[[Category: प्रथमानुयोग]]


== पुराणकोष से ==
== पुराणकोष से ==
<div class="HindiText">  <p id="1">(1) अर्जुन । <span class="GRef"> हरिवंशपुराण 50.94  </span>देखें [[ अर्जुन ]]</p>
<div class="HindiText">  <p id="1" class="HindiText">(1) अर्जुन । <span class="GRef"> [[ग्रन्थ:हरिवंश पुराण_-_सर्ग_50#94|हरिवंशपुराण - 50.94]] </span>देखें [[ अर्जुन ]]</p>
<p id="2">(2) विद्याधर विनमि का पुत्र । हपू0 22.104</p>
<p id="2" class="HindiText">(2) विद्याधर विनमि का पुत्र । <span class="GRef"> [[ग्रन्थ:हरिवंश पुराण_-_सर्ग_22#104|हरिवंशपुराण - 22.104]]  </span></p>
<p id="3">(3) विजयार्ध की दक्षिणश्रेणी के मेधपुर-नगर का नृप । इसकी पुत्री का नाम वनश्री था । <span class="GRef"> महापुराण 71. 252-253,  </span><span class="GRef"> हरिवंशपुराण 33.135  </span></p>
<p id="3" class="HindiText">(3) विजयार्ध की दक्षिणश्रेणी के मेधपुर-नगर का नृप । इसकी पुत्री का नाम वनश्री था । <span class="GRef"> महापुराण 71. 252-253,  </span><span class="GRef"> [[ग्रन्थ:हरिवंश पुराण_-_सर्ग_33#135|हरिवंशपुराण - 33.135]] </span></p>
<p id="4">(4) राजा धरण का दूसरा पुत्र । <span class="GRef"> हरिवंशपुराण 48.50 </span></p>
<p id="4" class="HindiText">(4) राजा धरण का दूसरा पुत्र । <span class="GRef"> [[ग्रन्थ:हरिवंश पुराण_-_सर्ग_48#50|हरिवंशपुराण - 48.50]] </span></p>
<p id="5">(5) राजा जरासंध का पुत्र । <span class="GRef"> हरिवंशपुराण 52.36 </span></p>
<p id="5" class="HindiText">(5) राजा जरासंध का पुत्र । <span class="GRef"> [[ग्रन्थ:हरिवंश पुराण_-_सर्ग_52#36|हरिवंशपुराण - 52.36]] </span></p>
<p id="6">(6) विजयार्ध-पर्वत की उत्तरश्रेणी का एक नगर । <span class="GRef"> महापुराण 19. 64,  </span><span class="GRef"> हरिवंशपुराण 22.86 </span></p>
<p id="6" class="HindiText">(6) विजयार्ध-पर्वत की उत्तरश्रेणी का एक नगर । <span class="GRef"> महापुराण 19. 64,  </span><span class="GRef"> [[ग्रन्थ:हरिवंश पुराण_-_सर्ग_22#86|हरिवंशपुराण - 22.86]] </span></p>
<p id="7">(7) महारत्नपुर-नगर का एक विद्याधर-राजा । <span class="GRef"> महापुराण 62.68,  </span><span class="GRef"> पांडवपुराण 4.27 </span></p>
<p id="7" class="HindiText">(7) महारत्नपुर-नगर का एक विद्याधर-राजा । <span class="GRef"> महापुराण 62.68,  </span><span class="GRef"> पांडवपुराण 4.27 </span></p>
<p id="8">(8) धातकीखंड के पूर्व विदेहक्षेत्र में पुष्कलावती-देश की पुंडरीकिणी-नगरी का राजा । यह बलभद्र-महाबल और नारायण-अतिबल का पिता था । <span class="GRef"> महापुराण 7.80-82 </span></p>
<p id="8" class="HindiText">(8) धातकीखंड के पूर्व विदेहक्षेत्र में पुष्कलावती-देश की पुंडरीकिणी-नगरी का राजा । यह बलभद्र-महाबल और नारायण-अतिबल का पिता था । <span class="GRef"> महापुराण 7.80-82 </span></p>
<p id="9">(9) विदेहक्षेत्र की पुंडरीकिणी-नगरी का निवासी एक सेठ । यह जयदत्ता का पिता था । धनश्री इसकी छोटी बहिन थी । जयदत्ता का विवाह वही के एक सेठ सर्वदयित से हुआ था । धनश्री का विवाह भी वही के दूसरे सेठ सर्वसमुद्र के साथ हुआ था । इसने मुंडरीकिणी नगरी के राजा यशपाल को रत्नों का उपहार दिया था । <span class="GRef"> महापुराण 47. 191-200 </span></p>
<p id="9" class="HindiText">(9) विदेहक्षेत्र की पुंडरीकिणी-नगरी का निवासी एक सेठ । यह जयदत्ता का पिता था । धनश्री इसकी छोटी बहिन थी । जयदत्ता का विवाह वही के एक सेठ सर्वदयित से हुआ था । धनश्री का विवाह भी वही के दूसरे सेठ सर्वसमुद्र के साथ हुआ था । इसने मुंडरीकिणी नगरी के राजा यशपाल को रत्नों का उपहार दिया था । <span class="GRef"> महापुराण 47. 191-200 </span></p>
<p id="10">(10) जंबूद्वीप के भरतक्षेत्र में कुरुजांगल देश के हस्तिनापुर नगर का राजा । <span class="GRef"> महापुराण 70.160 </span></p>
<p id="10" class="HindiText">(10) जंबूद्वीप के भरतक्षेत्र में कुरुजांगल देश के हस्तिनापुर नगर का राजा । <span class="GRef"> महापुराण 70.160 </span></p>
   </div>
   </div>



Latest revision as of 22:52, 31 August 2024



सिद्धांतकोष से

  1. विजयार्ध की उत्तरश्रेणी का एक नगर–देखें विजयार्ध ।
  2. दिगंबरांनाय के एक कवि थे। आपने द्विसंधानकाव्य और नाममाला कोश लिखे हैं। समय – डॉ. के. बी. पाठक के अनुसार आपका समय ई. 1123-1140 है। परंतु पं. महेंद्र कुमार व पं. पन्नालाल के अनुसार ई. 8। ( सिद्धि विनिश्चय/प्र.37/पं.महेंद्र ), ( ज्ञानार्णव/प्र.6/पं.पन्नालाल )


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

पुराणकोष से

(1) अर्जुन । हरिवंशपुराण - 50.94 देखें अर्जुन

(2) विद्याधर विनमि का पुत्र । हरिवंशपुराण - 22.104

(3) विजयार्ध की दक्षिणश्रेणी के मेधपुर-नगर का नृप । इसकी पुत्री का नाम वनश्री था । महापुराण 71. 252-253, हरिवंशपुराण - 33.135

(4) राजा धरण का दूसरा पुत्र । हरिवंशपुराण - 48.50

(5) राजा जरासंध का पुत्र । हरिवंशपुराण - 52.36

(6) विजयार्ध-पर्वत की उत्तरश्रेणी का एक नगर । महापुराण 19. 64, हरिवंशपुराण - 22.86

(7) महारत्नपुर-नगर का एक विद्याधर-राजा । महापुराण 62.68, पांडवपुराण 4.27

(8) धातकीखंड के पूर्व विदेहक्षेत्र में पुष्कलावती-देश की पुंडरीकिणी-नगरी का राजा । यह बलभद्र-महाबल और नारायण-अतिबल का पिता था । महापुराण 7.80-82

(9) विदेहक्षेत्र की पुंडरीकिणी-नगरी का निवासी एक सेठ । यह जयदत्ता का पिता था । धनश्री इसकी छोटी बहिन थी । जयदत्ता का विवाह वही के एक सेठ सर्वदयित से हुआ था । धनश्री का विवाह भी वही के दूसरे सेठ सर्वसमुद्र के साथ हुआ था । इसने मुंडरीकिणी नगरी के राजा यशपाल को रत्नों का उपहार दिया था । महापुराण 47. 191-200

(10) जंबूद्वीप के भरतक्षेत्र में कुरुजांगल देश के हस्तिनापुर नगर का राजा । महापुराण 70.160


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=धनंजय&oldid=135089"
Categories:
  • ध
  • प्रथमानुयोग
  • पुराण-कोष
  • करणानुयोग
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 31 August 2024, at 22:52.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki