• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

Help
 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

विमल: Difference between revisions

From जैनकोष

Revision as of 16:25, 6 October 2014 (view source)
Vikasnd (talk | contribs)
No edit summary
← Older edit
Revision as of 21:47, 5 July 2020 (view source)
Maintenance script (talk | contribs)
(Imported from text file)
Newer edit →
Line 1: Line 1:
<p class="HindiText"><ol>
== सिद्धांतकोष से ==
   <li> विजयार्ध की उत्तर श्रेणी का एक नगर–देखें - [[ विद्याधर | विद्याधर।  ]]</li>
<ol>
   <li> एक  ग्रह–देखें - [[ ग्रह | ग्रह।  ]]</li>
   <li> विजयार्ध की उत्तर श्रेणी का एक नगर–देखें [[ विद्याधर ]]। </li>
   <li> उत्तर क्षीरवर समुद्र का रक्षक देव–देखें - [[ व्यंतर ।#4 | व्यंतर । / ४]]</li>
   <li> एक  ग्रह–देखें [[ ग्रह ]]। </li>
   <li> सौमनस नामक  गजदन्त पर्वत का एक कूट– देखें - [[ लोक#5.4 | लोक / ५ / ४ ]]। </li>
   <li> उत्तर क्षीरवर समुद्र का रक्षक देव–देखें [[ व्यंतर#4 | व्यंतर - 4]]। </li>
   <li> रुचक पर्वत का एक कूट– देखें - [[ लोक#5.13 | लोक / ५ / १३ ]]।</li>
   <li> सौमनस नामक  गजदन्त पर्वत का एक कूट–देखें [[ लोक#5.4 | लोक - 5.4]]। </li>
   <li> सौधर्म स्वर्ग का द्वि. पटल– देखें - [[ स्वर्ग#5.3 | स्वर्ग / ५ / ३ ]]। </li>
   <li> रुचक पर्वत का एक कूट–देखें [[ लोक#5.13 | लोक - 5.13]]।</li>
   <li> भावी कालीन २२वें तीर्थंकर– देखें - [[ तीर्थंकर#5 | तीर्थंकर / ५ ]]। </li>
   <li> सौधर्म स्वर्ग का द्वि. पटल–देखें [[ स्वर्ग#5.3 | स्वर्ग - 5.3]]। </li>
   <li> वर्तमान १३वें तीर्थंकर–देखें - [[ विमलनाथ | विमलनाथ।  ]]</li>
   <li> भावी कालीन 22वें तीर्थंकर–देखें [[ तीर्थंकर#5 | तीर्थंकर - 5]]। </li>
</ol></p>
   <li> वर्तमान 13वें तीर्थंकर–देखें [[ विमलनाथ ]]। </li>
</ol>


[[विमर्श | Previous Page]]
<noinclude>
[[विमलदास | Next Page]]
[[ विमर्श | पूर्व पृष्ठ ]]


[[Category:व]]
[[ विमल सूरि | अगला पृष्ठ ]]
 
</noinclude>
[[Category: व]]
 
 
== पुराणकोष से ==
<p id="1">(1) रुचकगिरि की दक्षिणदिशा का एक कूट । यशोधरादिक्कुमारी-देवी यहाँ रहती है । <span class="GRef"> हरिवंशपुराण 5.709 </span></p>
<p id="2">(2) समवसरण के तीसरे कूट के पूर्वी द्वार का एक नाम । <span class="GRef"> हरिवंशपुराण 57. 57 </span></p>
<p id="3">(3) विजयार्ध पर्वत की उत्तरश्रेणी का उनचासवां नगर । <span class="GRef"> हरिवंशपुराण 22-90 </span></p>
<p id="4">(4) राजा समुद्र विजय का मंत्री । हु0 50.49</p>
<p id="5">(5) रुचकगिरि की पूर्वदिशा का एक कूट, चित्रादेवी की निवासभूमि । <span class="GRef"> हरिवंशपुराण 5.719 </span></p>
<p id="6">(6) सौधर्म युगल का दूसरा पटल । <span class="GRef"> हरिवंशपुराण 6.44  </span>देखें [[ सौधर्म ]]</p>
<p id="7">(7) आगामी बाईसवें तीर्थंकर । <span class="GRef"> महापुराण 76.480,  </span><span class="GRef"> हरिवंशपुराण 60. 561 </span></p>
<p id="8">(8) वर्तमान काल के तेरहवें तीर्थंकर । <span class="GRef"> महापुराण 2. 131,  </span><span class="GRef"> हरिवंशपुराण 1. 15  </span>देखें [[ विमलनाथ ]]</p>
<p id="9">(9) जम्बूद्वीप के विदेहक्षेत्र में रम्य क्षेत्र का एक पर्वत । <span class="GRef"> हरिवंशपुराण 60. 66 </span></p>
<p id="10">(10) क्षीरवर समुद्र का एक रक्षक देव । <span class="GRef"> हरिवंशपुराण 5.642 </span></p>
<p id="11">(11) मघवा चक्रवर्ती के पूर्वभव के जीव राजा शशिप्रभ के दीक्षागुरू । <span class="GRef"> पद्मपुराण 20.131-133 </span></p>
<p id="12">(12) सौमनस-पर्वत का एक कूट । <span class="GRef"> हरिवंशपुराण 15.221 </span></p>
 
<noinclude>
[[ विमर्श | पूर्व पृष्ठ ]]
 
[[ विमल सूरि | अगला पृष्ठ ]]
 
</noinclude>
[[Category: पुराण-कोष]]
[[Category: व]]

Revision as of 21:47, 5 July 2020

== सिद्धांतकोष से ==

  1. विजयार्ध की उत्तर श्रेणी का एक नगर–देखें विद्याधर ।
  2. एक ग्रह–देखें ग्रह ।
  3. उत्तर क्षीरवर समुद्र का रक्षक देव–देखें व्यंतर - 4।
  4. सौमनस नामक गजदन्त पर्वत का एक कूट–देखें लोक - 5.4।
  5. रुचक पर्वत का एक कूट–देखें लोक - 5.13।
  6. सौधर्म स्वर्ग का द्वि. पटल–देखें स्वर्ग - 5.3।
  7. भावी कालीन 22वें तीर्थंकर–देखें तीर्थंकर - 5।
  8. वर्तमान 13वें तीर्थंकर–देखें विमलनाथ ।


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ


पुराणकोष से

(1) रुचकगिरि की दक्षिणदिशा का एक कूट । यशोधरादिक्कुमारी-देवी यहाँ रहती है । हरिवंशपुराण 5.709

(2) समवसरण के तीसरे कूट के पूर्वी द्वार का एक नाम । हरिवंशपुराण 57. 57

(3) विजयार्ध पर्वत की उत्तरश्रेणी का उनचासवां नगर । हरिवंशपुराण 22-90

(4) राजा समुद्र विजय का मंत्री । हु0 50.49

(5) रुचकगिरि की पूर्वदिशा का एक कूट, चित्रादेवी की निवासभूमि । हरिवंशपुराण 5.719

(6) सौधर्म युगल का दूसरा पटल । हरिवंशपुराण 6.44 देखें सौधर्म

(7) आगामी बाईसवें तीर्थंकर । महापुराण 76.480, हरिवंशपुराण 60. 561

(8) वर्तमान काल के तेरहवें तीर्थंकर । महापुराण 2. 131, हरिवंशपुराण 1. 15 देखें विमलनाथ

(9) जम्बूद्वीप के विदेहक्षेत्र में रम्य क्षेत्र का एक पर्वत । हरिवंशपुराण 60. 66

(10) क्षीरवर समुद्र का एक रक्षक देव । हरिवंशपुराण 5.642

(11) मघवा चक्रवर्ती के पूर्वभव के जीव राजा शशिप्रभ के दीक्षागुरू । पद्मपुराण 20.131-133

(12) सौमनस-पर्वत का एक कूट । हरिवंशपुराण 15.221


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=विमल&oldid=43401"
Categories:
  • व
  • पुराण-कोष
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 5 July 2020, at 21:47.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki