• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

Help
 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

कनकध्वज: Difference between revisions

From जैनकोष

Revision as of 14:36, 3 August 2022 (view source)
Komaljain7 (talk | contribs)
No edit summary
← Older edit
Revision as of 20:27, 8 February 2023 (view source)
J2jinendra (talk | contribs)
No edit summary
Newer edit →
Line 1: Line 1:


== सिद्धांतकोष से ==
== सिद्धांतकोष से ==
(<span class="GRef"> पांडवपुराण/17/ </span>श्लोक) <span class="HindiText">दुर्योधन द्वारा घोषित आधे राज्य के लालच से इसने कृत्या नामक विद्या को सिद्ध करके (150-152) उसके द्वारा पांडवों को मारने का प्रयत्न किया, परंतु उसी विद्या से स्वयं मारा गया(209-19)।
(<span class="GRef"> पांडवपुराण/17/ श्लोक</span>) <span class="HindiText">दुर्योधन द्वारा घोषित आधे राज्य के लालच से इसने कृत्या नामक विद्या को सिद्ध करके (150-152) उसके द्वारा पांडवों को मारने का प्रयत्न किया, परंतु उसी विद्या से स्वयं मारा गया(209-19)।</span>


<noinclude>
<noinclude>
Line 12: Line 12:


== पुराणकोष से ==
== पुराणकोष से ==
<span class="HindiText">  (1) भविष्यत् कालीन चतुर्थ कुलकर । <span class="GRef"> महापुराण 76. 464 <span class="GRef"> हरिवंशपुराण 60.555 </br> <span class="HindiText"> (2) एक विद्वान् परलोभी नृप । दुर्योधन द्वारा घोषित आधे राज्य के लोभ से इसने पांडवों को सात दिन मे मारने का निश्चय किया था तथा कृत्या नामक विद्या सिद्ध करके इसने उन्हें मारने का प्रयत्न भी किया किंतु उसी विद्या से यह स्वयं मारा गया । <span class="GRef"> पांडवपुराण 17. 150-152, 209-219 </span>
<span class="HindiText">  (1) भविष्यत् कालीन चतुर्थ कुलकर ।</span> <span class="GRef"> महापुराण 76. 464 </span> <span class="GRef"> हरिवंशपुराण 60.555</span> </br> <span class="HindiText"> (2) एक विद्वान् परलोभी नृप । दुर्योधन द्वारा घोषित आधे राज्य के लोभ से इसने पांडवों को सात दिन मे मारने का निश्चय किया था तथा कृत्या नामक विद्या सिद्ध करके इसने उन्हें मारने का प्रयत्न भी किया किंतु उसी विद्या से यह स्वयं मारा गया ।</span> <span class="GRef"> पांडवपुराण 17. 150-152, 209-219 </span>





Revision as of 20:27, 8 February 2023



सिद्धांतकोष से

( पांडवपुराण/17/ श्लोक) दुर्योधन द्वारा घोषित आधे राज्य के लालच से इसने कृत्या नामक विद्या को सिद्ध करके (150-152) उसके द्वारा पांडवों को मारने का प्रयत्न किया, परंतु उसी विद्या से स्वयं मारा गया(209-19)।


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

पुराणकोष से

(1) भविष्यत् कालीन चतुर्थ कुलकर । महापुराण 76. 464 हरिवंशपुराण 60.555
(2) एक विद्वान् परलोभी नृप । दुर्योधन द्वारा घोषित आधे राज्य के लोभ से इसने पांडवों को सात दिन मे मारने का निश्चय किया था तथा कृत्या नामक विद्या सिद्ध करके इसने उन्हें मारने का प्रयत्न भी किया किंतु उसी विद्या से यह स्वयं मारा गया । पांडवपुराण 17. 150-152, 209-219



पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=कनकध्वज&oldid=110286"
Categories:
  • क
  • पुराण-कोष
  • प्रथमानुयोग
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 8 February 2023, at 20:27.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki