• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

Help
 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

गुणयोग: Difference between revisions

From जैनकोष

Revision as of 21:40, 5 July 2020 (view source)
Maintenance script (talk | contribs)
(Imported from text file)
← Older edit
Latest revision as of 17:47, 18 April 2023 (view source)
J2jinendra (talk | contribs)
No edit summary
 
Line 1: Line 1:
देखें [[ योग ]]।
<span class="GRef">धवला  10/4,  2, 4, 175/433-434/4</span>  <span class="PrakritText">तव्वदिरित्तदव्वजोगो अणेयविहो । तं  जहा-सूर-णक्खत्तजोगो चंद-णक्खत्तजोगोगह-णक्खत्तजोगो कोणंगारजोगो चुण्णजोगो मंतजोगो  इच्चेवमादओ ।...णोआगमभावजोगो तिविहो गुणजोगो संभवजोगो जुंजणजोगो चेदि । तत्थ  गुणजोगो दुविहो सच्चित्तगुजोगो अच्चित्तगुणजोगो चेदि । तत्थ अच्चित्तगुणजोगो जहा  रूव-रस-गंध-फासादीहि पोग्गलदव्वजोगो, आगासादीणमप्पप्पगो गुणेहि सह जोगो वा । तत्थ  सच्चित्तगुणजोगो पंचविहो - ओदइओ ओवसमिओ खइओ खओवसमिओ पारिणामिओ चेदि ।...इंदो मेरुं  चालइदु समत्थो त्ति एसो संभवजोगो णाम । जोसो जुंजणजोगो सो तिविहो उववादजोगो  एगंताणुवड्ढिजोगो परिणामजोगो चेदि ।</span> = <span class="HindiText">तद् व्यतिरिक्त नोआगम द्रव्य योग अनेक  प्रकार का है यथा<strong>−</strong>सूर्य-नक्षत्रयोग, चंद्र-नक्षत्रयोग, कोण अंगारयोग, चूर्णयोग व मंत्रयोग इत्यादि ।....नोआगम भावयोग तीन प्रकार  का है । '''गुणयोग''', संभवयोग और  योजनायोग । उनमें से '''गुणयोग''' दो प्रकार का है<strong>−</strong>सचित्तगुणयोग और अचित्तगुणयोग । उनमें से अचित्तगुणयोग -  जैसे रूप,  रस, गंध और स्पर्श  आदि गुणों से पुद्गल द्रव्य का योग, अथवा आकाशदि द्रव्यों का अपने-अपने गुणों के साथ योग ।  उनमें से सचित्तगुण योग पाँच प्रकार का है, औदयिक, औपशमिक, क्षायिक, क्षायोपशमिक और पारिणामिक| इंद्र मेरु पर्वत को चलाने के लिए समर्थ है, इस प्रकार का जो शक्ति का योग है वह संभवयोग कहा जाता है ।  जो योजना - (मन, वचन-काय का  व्यापार) योग है वह तीन प्रकार का है<strong>−</strong>उपपादयोग, एकांतानुवृद्धियोग और परिणामयोग<strong>−</strong>देखें [[ योग#5  | योग - 5 ]]। </span>
 
<span class="HindiText">देखें [[ योग ]]।</span>


<noinclude>
<noinclude>
Line 8: Line 10:
</noinclude>
</noinclude>
[[Category: ग]]
[[Category: ग]]
[[Category: करणानुयोग]]

Latest revision as of 17:47, 18 April 2023

धवला 10/4, 2, 4, 175/433-434/4 तव्वदिरित्तदव्वजोगो अणेयविहो । तं जहा-सूर-णक्खत्तजोगो चंद-णक्खत्तजोगोगह-णक्खत्तजोगो कोणंगारजोगो चुण्णजोगो मंतजोगो इच्चेवमादओ ।...णोआगमभावजोगो तिविहो गुणजोगो संभवजोगो जुंजणजोगो चेदि । तत्थ गुणजोगो दुविहो सच्चित्तगुजोगो अच्चित्तगुणजोगो चेदि । तत्थ अच्चित्तगुणजोगो जहा रूव-रस-गंध-फासादीहि पोग्गलदव्वजोगो, आगासादीणमप्पप्पगो गुणेहि सह जोगो वा । तत्थ सच्चित्तगुणजोगो पंचविहो - ओदइओ ओवसमिओ खइओ खओवसमिओ पारिणामिओ चेदि ।...इंदो मेरुं चालइदु समत्थो त्ति एसो संभवजोगो णाम । जोसो जुंजणजोगो सो तिविहो उववादजोगो एगंताणुवड्ढिजोगो परिणामजोगो चेदि । = तद् व्यतिरिक्त नोआगम द्रव्य योग अनेक प्रकार का है यथा−सूर्य-नक्षत्रयोग, चंद्र-नक्षत्रयोग, कोण अंगारयोग, चूर्णयोग व मंत्रयोग इत्यादि ।....नोआगम भावयोग तीन प्रकार का है । गुणयोग, संभवयोग और योजनायोग । उनमें से गुणयोग दो प्रकार का है−सचित्तगुणयोग और अचित्तगुणयोग । उनमें से अचित्तगुणयोग - जैसे रूप, रस, गंध और स्पर्श आदि गुणों से पुद्गल द्रव्य का योग, अथवा आकाशदि द्रव्यों का अपने-अपने गुणों के साथ योग । उनमें से सचित्तगुण योग पाँच प्रकार का है, औदयिक, औपशमिक, क्षायिक, क्षायोपशमिक और पारिणामिक| इंद्र मेरु पर्वत को चलाने के लिए समर्थ है, इस प्रकार का जो शक्ति का योग है वह संभवयोग कहा जाता है । जो योजना - (मन, वचन-काय का व्यापार) योग है वह तीन प्रकार का है−उपपादयोग, एकांतानुवृद्धियोग और परिणामयोग−देखें योग - 5 ।

देखें योग ।


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=गुणयोग&oldid=113472"
Categories:
  • ग
  • करणानुयोग
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 18 April 2023, at 17:47.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki