• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

Help
 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

अलंकारोदय: Difference between revisions

From जैनकोष

Revision as of 17:02, 1 April 2023 (view source)
Anita jain (talk | contribs)
mNo edit summary
← Older edit
Revision as of 22:15, 17 November 2023 (view source)
Maintenance script (talk | contribs)
(Imported from text file)
Newer edit →
Line 14: Line 14:


== पुराणकोष से ==
== पुराणकोष से ==
<div class="HindiText">  <p> पृथिवी के भीतर अत्यंत गुप्त इस नाम का एक नगर । यह छ: योजन गहरा, एक सौ साढ़े इकतीस योजन और डेढ़ कला प्रमाण चौड़ा था । इसमें बड़े-बड़े महल थे, यहाँ पहुँचने के लिए दंडक पर्वत के गुहाद्वार से नीचे जाने पर तोरणों से युक्त महाद्वार से प्रवेश करना पड़ता था । सीता-हरण के बाद यहाँ के राजा विराधित के निवेदन पर राम-लक्ष्मण ने कुछ समय यहाँ निवास किया था । <span class="GRef"> पद्मपुराण 5.163-166, 43.24-25, 45.92-99 </span></p>
<div class="HindiText">  <p> पृथिवी के भीतर अत्यंत गुप्त इस नाम का एक नगर । यह छ: योजन गहरा, एक सौ साढ़े इकतीस योजन और डेढ़ कला प्रमाण चौड़ा था । इसमें बड़े-बड़े महल थे, यहाँ पहुँचने के लिए दंडक पर्वत के गुहाद्वार से नीचे जाने पर तोरणों से युक्त महाद्वार से प्रवेश करना पड़ता था । सीता-हरण के बाद यहाँ के राजा विराधित के निवेदन पर राम-लक्ष्मण ने कुछ समय यहाँ निवास किया था । <span class="GRef"> [[ग्रन्थ:पद्मपुराण_-_पर्व_5#163|पद्मपुराण - 5.163-166]],[[ग्रन्थ:पद्मपुराण_-_पर्व_43#24|पद्मपुराण - 43.24-25]], 45.92-99 </span></p>
   </div>
   </div>



Revision as of 22:15, 17 November 2023



सिद्धांतकोष से

( पद्मपुराण सर्ग 4/श्लो.नं.) पृथिवी के भीतर अत्यंत गुप्त एक सुंदर नगरी थी/162-164। इसको रावण के पूर्वज मेघवाहन के लिए राक्षसों के इंद्र भीम सुभीम ने रक्षार्थ प्रदान की थी।


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ


पुराणकोष से

पृथिवी के भीतर अत्यंत गुप्त इस नाम का एक नगर । यह छ: योजन गहरा, एक सौ साढ़े इकतीस योजन और डेढ़ कला प्रमाण चौड़ा था । इसमें बड़े-बड़े महल थे, यहाँ पहुँचने के लिए दंडक पर्वत के गुहाद्वार से नीचे जाने पर तोरणों से युक्त महाद्वार से प्रवेश करना पड़ता था । सीता-हरण के बाद यहाँ के राजा विराधित के निवेदन पर राम-लक्ष्मण ने कुछ समय यहाँ निवास किया था । पद्मपुराण - 5.163-166,पद्मपुराण - 43.24-25, 45.92-99


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=अलंकारोदय&oldid=119301"
Categories:
  • अ
  • पुराण-कोष
  • प्रथमानुयोग
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 17 November 2023, at 22:15.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki