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सम्यक् नय: Difference between revisions

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देखें [[ नय#II | नय - II]]।
<span class="GRef">स्याद्वादमंजरी/74/4</span>  <span class="SanskritText">सम्यगेकांतो नय: मिथ्यैकांतो नयाभास:।=सम्यगेकांत को नय कहते हैं और मिथ्या एकांत को नयाभास या मिथ्या नय। (देखें [[ एकांत#1.1 | एकांत - 1. 1]]), (विशेष देखें  अगले शीर्षक )। ( स्याद्वादमंजरी/ मूल व टीका/28/307,10) सदेव सत् स्यात्सदिति त्रिधार्थो मीयते दुर्नीतिनयप्रमाणै:। यथार्थदर्शी तु नयप्रमाणपथेन दुर्नीतिपथं त्वमास्थ:।28।...नीयते परिच्छिद्यते एकदेशविशिष्टोऽर्थ आभिरिति नीतयो नया:। दुष्टा नीतयो दुर्नीतयो दुर्नया इत्यर्थ:।</span>=<span class="HindiText">पदार्थ ‘सर्वथा सत् है’, ‘सत् है’ और कथंचित् सत् है’ इस प्रकार क्रम से दुर्नय, नय और प्रमाण से पदार्थों का ज्ञान होता है। यथार्थ मार्ग को देखने वाले आपने ही नय और प्रमाणमार्ग के द्वारा दुर्नयवाद का निराकरण किया है।28। जिसके द्वारा पदार्थों के एक अंश का ज्ञान हो उसे नय ('''सम्यक् नय''') कहते हैं। खोटे नयों को या दुर्नीतियों को दुर्नय कहते हैं।</span>
 
<span class="HindiText">अधिक जानकारी के लिये देखें  [[ नय#II | नय - II]]।</span>


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[[Category: स]]
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Latest revision as of 10:22, 20 February 2024

स्याद्वादमंजरी/74/4 सम्यगेकांतो नय: मिथ्यैकांतो नयाभास:।=सम्यगेकांत को नय कहते हैं और मिथ्या एकांत को नयाभास या मिथ्या नय। (देखें एकांत - 1. 1), (विशेष देखें अगले शीर्षक )। ( स्याद्वादमंजरी/ मूल व टीका/28/307,10) सदेव सत् स्यात्सदिति त्रिधार्थो मीयते दुर्नीतिनयप्रमाणै:। यथार्थदर्शी तु नयप्रमाणपथेन दुर्नीतिपथं त्वमास्थ:।28।...नीयते परिच्छिद्यते एकदेशविशिष्टोऽर्थ आभिरिति नीतयो नया:। दुष्टा नीतयो दुर्नीतयो दुर्नया इत्यर्थ:।=पदार्थ ‘सर्वथा सत् है’, ‘सत् है’ और कथंचित् सत् है’ इस प्रकार क्रम से दुर्नय, नय और प्रमाण से पदार्थों का ज्ञान होता है। यथार्थ मार्ग को देखने वाले आपने ही नय और प्रमाणमार्ग के द्वारा दुर्नयवाद का निराकरण किया है।28। जिसके द्वारा पदार्थों के एक अंश का ज्ञान हो उसे नय (सम्यक् नय) कहते हैं। खोटे नयों को या दुर्नीतियों को दुर्नय कहते हैं।

अधिक जानकारी के लिये देखें नय - II।


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