• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

Help
 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

इति: Difference between revisions

From जैनकोष

Revision as of 16:19, 19 August 2020 (view source)
Maintenance script (talk | contribs)
(Imported from text file)
← Older edit
Revision as of 16:55, 14 August 2022 (view source)
Ankitjain (talk | contribs)
mNo edit summary
Newer edit →
Line 1: Line 1:
<p class="SanskritText">राजवार्तिक अध्याय 1/13/1/57/11 इतिशब्दोऽनेकार्थः संभवति। क्वचिद्धेतौ वर्तते-`हंतीति पलायते, वर्षतीति धावति'। क्वचिदेवमित्यस्यार्थे वर्तते-`इति स्म उपाध्यायः कथयति' एवं स्म इति गम्यते। क्वचित्प्रकारे वर्तते-यथा `गौरश्वः' शुक्लो नीलः, चरति प्लवते, जिन दत्ती देवदत्तः' `इति, एवं प्रकाराः इत्यर्थः। क्वचिद्व्यवस्थायां वर्तते-यथा `ज्वलितिकसंताण्णः' [जैने. 2/112] इति। क्वचिदर्थविपर्यासे वर्तते - यथा `गौरित्ययमाह-गौरिति जानीते' इति। क्वचित्समाप्तौ वर्तते-`इति प्रथकमाह्निकम्, इति द्वितीयमाह्निकम्' इति। कच्छिब्दप्रादुर्भावे वर्तते-`इति श्रीदत्तम, इति सिद्धसेनमिति।'</p>
<p class="SanskritText">राजवार्तिक अध्याय 1/13/1/57/11 इतिशब्दोऽनेकार्थः संभवति। क्वचिद्धेतौ वर्तते-`हंतीति पलायते, वर्षतीति धावति'। क्वचिदेवमित्यस्यार्थे वर्तते-`इति स्म उपाध्यायः कथयति' एवं स्म इति गम्यते। क्वचित्प्रकारे वर्तते-यथा `गौरश्वः' शुक्लो नीलः, चरति प्लवते, जिन दत्ती देवदत्तः' `इति, एवं प्रकाराः इत्यर्थः। क्वचिद्व्यवस्थायां वर्तते-यथा `ज्वलितिकसंताण्णः' [जैने. 2/112] इति। क्वचिदर्थविपर्यासे वर्तते - यथा `गौरित्ययमाह-गौरिति जानीते' इति। क्वचित्समाप्तौ वर्तते-`इति प्रथकमाह्निकम्, इति द्वितीयमाह्निकम्' इति। कच्छिब्दप्रादुर्भावे वर्तते-`इति श्रीदत्तम, इति सिद्धसेनमिति।'</p>
<p class="HindiText">= इति शब्दके अनेक अर्थ होते हैं-यथा-1. हंतीति पलायते-`मारा इसलिए भागा' यहाँ इति शब्दका अर्थ हेतु है। 2. इति स्म उपाध्यायः कथयति-उपाध्याय इस प्रकार कहता है। यहाँ `इस प्रकार' अर्थ है। 3. `गौः अश्वः इति'-गाय, घोड़ा आदि प्रकार। यहाँ इति शब्द प्रकारवाची है। 4. प्रथममाह्निकमिति' यहाँ इति शब्दका अर्थ समाप्ति है। 5. इसी तरह व्यवस्था अर्थविपर्यास शब्द प्रादुर्भाव आदि अनेक अर्थ हैं।</p>
 
<p class="HindiText">= इति शब्दके अनेक अर्थ होते हैं-यथा- <br> 1. हंतीति पलायते-`मारा इसलिए भागा' यहाँ इति शब्दका अर्थ हेतु है। <br>2. इति स्म उपाध्यायः कथयति-उपाध्याय इस प्रकार कहता है। यहाँ `इस प्रकार' अर्थ है। <br>3. `गौः अश्वः इति'-गाय, घोड़ा आदि प्रकार। यहाँ इति शब्द प्रकारवाची है। <br>4. प्रथममाह्निकमिति' यहाँ इति शब्द का अर्थ समाप्ति है। <br>5. इसी तरह व्यवस्था अर्थविपर्यास शब्द प्रादुर्भाव आदि अनेक अर्थ हैं।</p>
   
   



Revision as of 16:55, 14 August 2022



राजवार्तिक अध्याय 1/13/1/57/11 इतिशब्दोऽनेकार्थः संभवति। क्वचिद्धेतौ वर्तते-`हंतीति पलायते, वर्षतीति धावति'। क्वचिदेवमित्यस्यार्थे वर्तते-`इति स्म उपाध्यायः कथयति' एवं स्म इति गम्यते। क्वचित्प्रकारे वर्तते-यथा `गौरश्वः' शुक्लो नीलः, चरति प्लवते, जिन दत्ती देवदत्तः' `इति, एवं प्रकाराः इत्यर्थः। क्वचिद्व्यवस्थायां वर्तते-यथा `ज्वलितिकसंताण्णः' [जैने. 2/112] इति। क्वचिदर्थविपर्यासे वर्तते - यथा `गौरित्ययमाह-गौरिति जानीते' इति। क्वचित्समाप्तौ वर्तते-`इति प्रथकमाह्निकम्, इति द्वितीयमाह्निकम्' इति। कच्छिब्दप्रादुर्भावे वर्तते-`इति श्रीदत्तम, इति सिद्धसेनमिति।'

= इति शब्दके अनेक अर्थ होते हैं-यथा-
1. हंतीति पलायते-`मारा इसलिए भागा' यहाँ इति शब्दका अर्थ हेतु है।
2. इति स्म उपाध्यायः कथयति-उपाध्याय इस प्रकार कहता है। यहाँ `इस प्रकार' अर्थ है।
3. `गौः अश्वः इति'-गाय, घोड़ा आदि प्रकार। यहाँ इति शब्द प्रकारवाची है।
4. प्रथममाह्निकमिति' यहाँ इति शब्द का अर्थ समाप्ति है।
5. इसी तरह व्यवस्था अर्थविपर्यास शब्द प्रादुर्भाव आदि अनेक अर्थ हैं।



पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=इति&oldid=92595"
Category:
  • इ
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 14 August 2022, at 16:55.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki