ज्ञातृधर्मकथांग

From जैनकोष



द्वादशांगश्रुत का छठा अंग । इसमें पाँच लाख छप्पन हजार पद हैं । महापुराण 34.140 हरिवंशपुराण 2. 93, 10.26


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