• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

Help
 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

भद्र: Difference between revisions

From जैनकोष

Revision as of 21:53, 15 February 2023 (view source)
Ruma jain (talk | contribs)
(→‎सिद्धांतकोष से)
← Older edit
Latest revision as of 15:15, 27 November 2023 (view source)
Maintenance script (talk | contribs)
(Imported from text file)
 
(One intermediate revision by the same user not shown)
Line 17: Line 17:


== पुराणकोष से ==
== पुराणकोष से ==
<div class="HindiText">  <p id="1"> (1) सूर्यवंश में हुए राजा '''सागर का पुत्र''' और राजा रवितेज का पिता । इसने सार-सागर से भयभीत होकर निर्ग्रंथ व्रत ले लिया था । <span class="GRef"> पद्मपुराण 5.6,9 </span></p>
<div class="HindiText">  <p id="1" class="HindiText"> (1) सूर्यवंश में हुए राजा '''सागर का पुत्र''' और राजा रवितेज का पिता । इसने सार-सागर से भयभीत होकर निर्ग्रंथ व्रत ले लिया था । <span class="GRef"> [[ग्रन्थ:पद्मपुराण_-_पर्व_5#6|पद्मपुराण - 5.6]],9 </span></p>
<p id="2">(2) सौधर्म और ऐशान मुगल स्वर्गों का इक्कीसवाँ इंद्रक । <span class="GRef"> हरिवंशपुराण 6.46,  </span>देखें [[ सौधर्म ]]</p>
<p id="2" class="HindiText">(2) सौधर्म और ऐशान मुगल स्वर्गों का इक्कीसवाँ इंद्रक । <span class="GRef"> [[ग्रन्थ:हरिवंश पुराण_-_सर्ग_6#46|हरिवंशपुराण - 6.46]],  </span>देखें [[ सौधर्म ]]</p>
<p id="3">(3) नंदीश्वर समुद्र के दो रक्षक देवो में प्रथम रक्षक देव । <span class="GRef"> हरिवंशपुराण 5. 645 </span></p>
<p id="3" class="HindiText">(3) नंदीश्वर समुद्र के दो रक्षक देवो में प्रथम रक्षक देव । <span class="GRef"> [[ग्रन्थ:हरिवंश पुराण_-_सर्ग_5#645|हरिवंशपुराण - 5.645]] </span></p>
<p id="4">(4) भरतेश के भाइयों द्वारा त्यक्त देशों में भरतक्षेत्र के मध्य का एक देश । हुपु0 11.75</p>
<p id="4" class="HindiText">(4) भरतेश के भाइयों द्वारा त्यक्त देशों में भरतक्षेत्र के मध्य का एक देश । हुपु0 11.75</p>
<p id="5">(5) राजा शंख का पुत्र और चेदिराट् के संस्थापक तथा शुक्तिमती नगरी के निर्माता अभिचंद्र का पिता । <span class="GRef"> हरिवंशपुराण 17.35-36 </span></p>
<p id="5" class="HindiText">(5) राजा शंख का पुत्र और चेदिराट् के संस्थापक तथा शुक्तिमती नगरी के निर्माता अभिचंद्र का पिता । <span class="GRef"> [[ग्रन्थ:हरिवंश पुराण_-_सर्ग_17#35|हरिवंशपुराण - 17.35-36]] </span></p>
<p id="6">(6) '''तीसरे बलभद्र''' । ये अनुत्तर विमान से चयकर सुवेषा स्त्री के गर्भ से उत्पन्न हुए थे । आयु के अंत में ये संसार से उदासीन हुए और तप से कर्मों को भस्म करके मोक्ष गये । <span class="GRef"> पद्मपुराण 20.236-238, 248 </span></p>
<p id="6" class="HindiText">(6) '''तीसरे बलभद्र''' । ये अनुत्तर विमान से चयकर सुवेषा स्त्री के गर्भ से उत्पन्न हुए थे । आयु के अंत में ये संसार से उदासीन हुए और तप से कर्मों को भस्म करके मोक्ष गये । <span class="GRef"> [[ग्रन्थ:पद्मपुराण_-_पर्व_20#236|पद्मपुराण - 20.236-238]], 248 </span></p>
<p id="7">(7) द्वारावती नगरी का नृप । इसकी दो रानियाँ थी― सुभद्रा और पृथिवी । बलभद्र धर्म और नारायण स्वयंभू इसी के पुत्र थे । <span class="GRef"> महापुराण 59.71, 86-87 </span></p>
<p id="7" class="HindiText">(7) द्वारावती नगरी का नृप । इसकी दो रानियाँ थी― सुभद्रा और पृथिवी । बलभद्र धर्म और नारायण स्वयंभू इसी के पुत्र थे । <span class="GRef"> महापुराण 59.71, 86-87 </span></p>
<p id="8">(8) जंबूद्वीप में ऐरावत क्षेत्र के रत्नपुर नगर का एक गाड़ीवान । यह धन्य गाड़ीवान का अग्रज था । किसी बैल के निमित्त से ये दोनों एक-दूसरे का घात कर मर गये थे । <span class="GRef"> महापुराण 63.157-158 </span></p>
<p id="8" class="HindiText">(8) जंबूद्वीप में ऐरावत क्षेत्र के रत्नपुर नगर का एक गाड़ीवान । यह धन्य गाड़ीवान का अग्रज था । किसी बैल के निमित्त से ये दोनों एक-दूसरे का घात कर मर गये थे । <span class="GRef"> महापुराण 63.157-158 </span></p>
<p id="9">(9) कुलकर सन्मति के समयवर्ती सरल परिणामी आर्य पुरुष । <span class="GRef"> महापुराण 3.83, 93 </span></p>
<p id="9" class="HindiText">(9) कुलकर सन्मति के समयवर्ती सरल परिणामी आर्य पुरुष । <span class="GRef"> महापुराण 3.83, 93 </span></p>
<p id="10">(10) सौधर्मेंद्र द्वारा स्तुत वृषभदेव का एक नाम । <span class="GRef"> महापुराण 25. 213 </span></p>
<p id="10">(10) सौधर्मेंद्र द्वारा स्तुत वृषभदेव का एक नाम । <span class="GRef"> महापुराण 25. 213 </span></p>
   </div>
   </div>

Latest revision as of 15:15, 27 November 2023



सिद्धांतकोष से

  1. सागार धर्मामृत/1/9 कुधर्मस्थोऽपि सद्धर्म, लघुकर्मतयाऽद्विषन्। भद्र: स... अभ्रदस्तद्विपर्ययात्।9। = मिथ्यामत में स्थित होता हुआ भी मिथ्यात्व की मंदता से समीचीन जैनधर्म से द्वेष नहीं करने वाला व्यक्ति भद्र कहलाता है। उससे विपरीत अभद्र कहलाता है।
  2. आचार्य भद्रबाहु द्वि०: आपके अपरनाम यशोभद्र व अभय थे| अधिक जानकारी के लिए देखें -यशोभद्र ;
  3. रुचक पर्वतस्थ भद्र नामक एक कूट है| अधिक जानकारी के लिए देखें - लोक - 5.13;
  4. नंदीश्वर समुद्र का रक्षक भद्र नामक व्यंतर देव है | अधिक जानकारी के लिए देखें - व्यंतर - 4.7।


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

पुराणकोष से

(1) सूर्यवंश में हुए राजा सागर का पुत्र और राजा रवितेज का पिता । इसने सार-सागर से भयभीत होकर निर्ग्रंथ व्रत ले लिया था । पद्मपुराण - 5.6,9

(2) सौधर्म और ऐशान मुगल स्वर्गों का इक्कीसवाँ इंद्रक । हरिवंशपुराण - 6.46, देखें सौधर्म

(3) नंदीश्वर समुद्र के दो रक्षक देवो में प्रथम रक्षक देव । हरिवंशपुराण - 5.645

(4) भरतेश के भाइयों द्वारा त्यक्त देशों में भरतक्षेत्र के मध्य का एक देश । हुपु0 11.75

(5) राजा शंख का पुत्र और चेदिराट् के संस्थापक तथा शुक्तिमती नगरी के निर्माता अभिचंद्र का पिता । हरिवंशपुराण - 17.35-36

(6) तीसरे बलभद्र । ये अनुत्तर विमान से चयकर सुवेषा स्त्री के गर्भ से उत्पन्न हुए थे । आयु के अंत में ये संसार से उदासीन हुए और तप से कर्मों को भस्म करके मोक्ष गये । पद्मपुराण - 20.236-238, 248

(7) द्वारावती नगरी का नृप । इसकी दो रानियाँ थी― सुभद्रा और पृथिवी । बलभद्र धर्म और नारायण स्वयंभू इसी के पुत्र थे । महापुराण 59.71, 86-87

(8) जंबूद्वीप में ऐरावत क्षेत्र के रत्नपुर नगर का एक गाड़ीवान । यह धन्य गाड़ीवान का अग्रज था । किसी बैल के निमित्त से ये दोनों एक-दूसरे का घात कर मर गये थे । महापुराण 63.157-158

(9) कुलकर सन्मति के समयवर्ती सरल परिणामी आर्य पुरुष । महापुराण 3.83, 93

(10) सौधर्मेंद्र द्वारा स्तुत वृषभदेव का एक नाम । महापुराण 25. 213


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=भद्र&oldid=127087"
Categories:
  • भ
  • पुराण-कोष
  • प्रथमानुयोग
  • करणानुयोग
  • चरणानुयोग
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 27 November 2023, at 15:15.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki