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सागरसेन

From जैनकोष



(1) सहस्राम्र वन में आये एक मुनिराज । अरिष्टपुर नगर का राजा वासव इन्हीं से दीक्षित हुआ था । महापुराण 71.400-402, हरिवंशपुराण - 60.76

(2) राजा वसु की वंश परंपरा में हुए राजाओं में राजा दीपन का पुत्र और राजा सुमित्र का पिता । हरिवंशपुराण - 18.19

(3) एक मुनि । पुरुरवा भील इन्हें मृग समझकर मारना चाहता था किंतु उसकी स्त्री ने ऐसा नहीं होने दिया था । पुरुरवा ने इनसे क्षमा मांगकर धर्मोपदेश सुना और मद्य-मांसादि का भक्षण तथा जीवघात त्यागकर समाधिपूर्वक देह त्याग की और सौधर्म स्वर्ग में देव हुआ । महापुराण 62. 86-88, 74. 14-22, वीरवर्द्धमान चरित्र 2.18-38

(4) एक विद्वान् । सिद्धार्थ नगर के राजा क्षेमंकर के देशभूषण और कुलभूषण दोनों पुत्रों ने इसी विद्वान् के पास अनेक कलाएँ सीखी थीं । पद्मपुराण - 39.158-161

(5) एक चारण ऋद्धिधारी मुनि । ये दमधर मुनि के नाथ मनोहर वन में तपस्या कर रहे थे । इन्होंने इसी वन में ही आहार लेने की प्रतिज्ञा की थी । विजय यात्रा के प्रसंग से वज्रजंघ वहाँ आया और उसने वन में ही आहार देकर पंचाश्चर्य प्राप्त किये । महापुराण 8.167-173

(6) विदेहक्षेत्र की पुंडरीकिणी नगरी का एक वैश्य । सेठ सर्वदयित के पिता की छोटी बहिन देवश्री इसकी पत्नी थी । इससे इसके दो पुत्र थे― सागरदत्त और समुद्रदत्त । एक पुत्री भी थी जिसका नाम समुद्रदत्ता था । महापुराण 47.191, 195-196

(7) धरणिभूषण पर्वत के प्रियंकर उद्यान में आये एक मुनिराज । आयु के अंत में संन्यासपूर्वक देह त्यागकर ये स्वर्ग गये । महापुराण 76.220-221, 350


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